शुक्रवार, जनवरी 20, 2017

Introduction to Chhindwara ऐतिहासिक महत्व

छिन्दवाड़ा शहर, छिन्दवाड़ा जिले का मुख्यालय भी हैं, जो जबलपुर प्रशासनिक संभाग के अंतर्गत आता है। 1956 में नगरपालिका बनी।

ऐसी मान्यता है कि इस क्षेत्र में छिन्द (पिन्ड-खजूर) के पेड़ बहुतायत में पाये जाते थे जिससे शहर का नाम ”छिन्द“ ”वाड़ा“ (जगह) पड़ा। यह भी मान्यता है कि सिंहों की आबादी से इस जिले का प्रवेश सिंह की मान्द से गुजरने सरीखा है तदापि इसे सिंह द्धार (अर्थात् सिंह के प्रवेश से) कहा गया। कालांतर में यह छिन्दवाड़ा हो गया।

छिन्दवाड़ा के संस्थापक संभवतः अयोध्या के रतन रघुवंशी थे जिन्होंने क्षेत्र के गाउली मुखिया का बध किया था। इसके बाद उन्होने एक बकरी छोड़ी और जिस जगह वह बैठी उसी स्थान पर एक घर खड़ा किया जिसकी नींव में उस बकरी को जिन्दा दफन कर दिया। बाद में उस स्थान पर एक चबूतरा बना दिया गया। यहाँ इसकी देवी की तरह उपासना होती है। छिन्दवाड़ा में एक मिट्टी का किला है, जिसमें एक पुराना पत्थर का मकान है, जो रतन रघुवंशी का माना जाता है। 1857-58 के विद्रोह के पहले छिन्दवाड़ा में सैनिकों का अड्डा था। कुछ अंतराल के लिये इस घर का इस्तेमाल कैमप्टी छावनी के हस्पताल की तरह भी किया गया।

शहर का गोलगंज बाजार अपने दो बड़े दरवाजों (आज के कामानिया गेट) के साथ कैप्टन मौन्टगांमेरि द्वारा बनवाया गया था, जिसने जिले का शासन रिचर्ड जेन किंस (1818-1830) के प्रतिशासक के तौर पर किया था। छिन्दवाड़ा नगर पालिका के स्थापना 1867 हुई थी।

Location and Climate of Chhindwara भौगोलिक स्थिति एवं जलवायु

छिन्दवाड़ा सतपुड़ा पहाडि़यों से बहुत अच्छी तरह से घिरा हुआ है और यही शहर के मौसम और वातावरण और आदर्श बनाती हैं। गर्मियों का मौसम अमूमन मई माह से शुरू होता है तथा तापमान 40 डिग्री अधिकतम तथा न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस तक जाता है। हालाँकि जंगलों और सतपुड़ा की वादियों की वहज से बढ़ते तापमानों का खास असर नहीं पड़ता। सर्दियों का मौसम अक्टूबर से मार्च के मध्य रहता है जिसमं तापमान 80 सेल्सियस तक उतर जाता है। मानसून का आगाज अक्सर जून के दूसरे सप्ताह से हो जाता है तथा जुलाई माह मे सबसे ज्यादा बारिश होती है। मौसम विभाग के अनुसार औसत बारिश 1004.7 मि.मी. तथा अधिकतम वर्षा 1541.4 मि.मी. हैं।

पेंच नदी छिन्दवाड़ा और सविनी जिलों की सीमाओं पर बहती हुई कन्हान नदी का उद्गम उमरेठ से होता है, तथा यह छिन्दवाड़ा और मोहखेड़ से बहते हुये पेंच नदी में मिल जाती है। छिन्दवाड़ा में औसतन 675 मिमी वर्षा होती है।

Connectivity to Chhindwara सम्पर्क

सड़क संपर्क :- छिन्दवाड़ा देश के अन्य हिस्सों से सड़क व रेल मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा है। हालांकि कोई भी राष्ट्रीय राजमार्ग शहर से नहीं गुजरता है लेकिन ये राजकीय राजमार्गों के जाल से भोपाल (277 कि.मी) नागपुर (128 कि.मी.) तथा जबलपुर (196 कि.मी.) से जुड़ा हुआ हैं।

रेल संपर्क :- छिन्दवाड़ा, भोपाल व जबलपुर से बड़ी लाईन से तथा नागपुर से छोटी लाईन से जुड़ा हुआ है, तदापि इसे भी बड़ी लाईन में बदलने का प्रस्ताव हैं। इस जगह की महत्ता मध्य रेल के प्रमुख रेलमार्ग पर स्थित होने से और भी बढ़ी हुई हैं। छिन्दवाड़ा स्टेहशन ”छिन्दवाड़ा जक्शं9न“ के नाम से जाना जाता है।

हवाई संपर्क :- छिन्दवाड़ा में कोई हवाई अड्डा नहीं है। हालाकिं नागपुर (130 कि.मी.) सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है जो आगे अन्य हवाई अड्डों से जुड़ा है। छिन्दवाड़ा भोपाल (277 कि.मी.) तथा रायपुर (413 कि.मी.) से भी पहुँचा जा सकता है जो हवाई मार्गों से जुड़े हैं।
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